यहां हल्की सी चिंगारी से तबाह हो सकता है पूरा गांव, जानिए कैसे

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Friday, October 13, 2017-2:12 AM

कुल्लू: जिला कुल्लू में कई ग्रामीण इलाकों में कई आशियाने लाक्षागृह बने हुए हैं। हल्की सी चिंगारी समूचे गांव को तबाह कर सकती है। बार-बार हो रहे भयंकर अग्निकांडों से सबक नहीं लिया जा रहा है। जिला कुल्लू में पूर्व में हुए कईअग्निकांडों में करोड़ों रुपए की संपत्ति राख हो चुकी है। मोहणी, मलाणा, शिल्हा, कोटला, गाहर, बरशैणी व शांघड़ सहित कई गांव जलकर राख हो गए थे। इन अग्निकांडों में करोड़ों रुपए की संपत्ति जलकर स्वाह हो गई। अधिकतर अग्निकांडों में छानबीन के बाद यह पाया गया था कि घर के समीप रखे सूखे चारे ने पहले आग पकड़ी। घर के बरामदे में रखी लकडिय़ों के ढेर में पहले आग लगी।

बड़ी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
इस तरह की घटनाओं के बाद संबंधित गांवों सहित अन्य इलाकों में लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर भी लगाए गए और घरों में सूखा पशुचारा एकत्रित न करने की सलाह दी। पूर्व में हुई बड़ी घटनाओं से भी लोगों ने सबक नहीं लिया है। कई दिनों तक राख के ढेर में तबदील हुए गांव सुलगते रहे और धुआं उठता रहा। जिला कुल्लू के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी कई ऐसे आशियाने हैं जहां लोगों ने सूखे पशुचारे या सूखी लकडिय़ों का भंडारण कर रखा है। एकत्रित कर रखा सूखा पशुचारा और लकडिय़ां ही बारूद का काम कर सकते हैं। 

काष्ठकुणी शैली में बने हैं मकान
ग्रामीण इलाकों में आज भी कई मकान काष्ठकुणी शैली में बने हैं। इन मकानों में लकड़ी का अधिक इस्तेमाल हुआ होता है। खंभों के साथ साथ खिड़की, दरवाजों और छत में भी बड़े पैमाने पर लकड़ी लगी हुई होती है। पूर्व में देखा गया है कि ऐसे मकान अग्निकांड के बाद कई दिनों तक सुलगते रहे। वैसे भी ग्रामीण इलाकों में लकड़ी के मकान ज्यादा होते हैं। 

घर से कुछ दूरी पर स्टोर करें पशुचारा और ईंधन 
फायर ऑफिसर कुल्लू दुगा दास ने बताया कि हम ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करते हैं और शिविर आदि भी लगाते हैं। लोगों को बताया जाता है कि पशुचारा और ईंधन के लिए लकड़ी गांव से दूर या अपने घर से कुछ दूरी पर स्टोर करें। अन्य कई बिंदुओं पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे अग्निकांड जैसी घटनाओं से बचा जा सके। 

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