बर्फ बनी मुसीबत, 5वें दिन भी रैस्क्यू नहीं हो पाए घाटी में फंसे लोग

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Tuesday, November 21, 2017-10:48 PM

मनाली: बर्फ के बीच फंसे लोगों को 5वें दिन भी राहत नहीं मिल सकी है। बर्फबारी के बाद रोहतांग दर्रा बंद होने के कारण कई लोग घाटी के विभिन्न हिस्सों में फंसे हैं। बी.आर.ओ. 70 आर.सी.सी. ने रोहतांग दर्रे को बहाल करने की मुहिम शुरू कर दी है। रोहतांग सुरंग के दोनों छोर जुड़ गए हैं, जिससे आपात स्थिति में लोगों को सुरंग से भी आर-पार करवाया जा सकता है। बी.आर.ओ. रोहतांग सुरंग परियोजना के पास एक विकल्प यह भी है लेकिन इस ओर अभी पहल नहीं हो सकी है। 

रोहतांग दर्रे से होकर रैस्क्यू किए जाएंगे घाटी में फंसे लोग 
रोहतांग सुरंग के भीतर से आम लोगों की आवाजाही को लेकर आज लाहौल-स्पीति प्रशासन और बी.आर.ओ. की बैठक संपन्न हुई। रोहतांग टनल प्रोजैक्ट के मुख्य अभियंता कर्नल निलेश चंद्रा राणा ने बताया कि घाटी में फंसे लोगों को रोहतांग दर्रा होकर रैस्क्यू किया जाएगा जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के बीच घाटी में फंसने वाले मरीजों और अन्य जरूरतमंद लोगों को किस तरह रोहताग सुरंग होकर रैस्क्यू किया जाए, इसको लेकर लाहौल-स्पीति प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। कर्नल चंद्र राणा ने बताया कि बर्फ  के बीच फंसने वाले मरीजों को पहले मैडीकल बोर्ड से एमरजैंसी घोषित होने के बाद टनल प्रबंधन उनके रैस्क्यू को लेकर विचार करेगी। हालांकि यह अभी तय नहीं है कि मरीजों को रोहतांग टनल से ही रैस्क्यू किया जाएगा। 

बी.आर.ओ. बुधवार तक करेगा दर्रे को बहाल 
उधर, केलांग के एस.डी.एम. कुलदीप सिंह राणा ने बताया कि प्रशासन की बी.आर.ओ. संग से बैठक हुई है, जिसमें सर्दियों के दौरान आपात स्थिति में सुरंग से आने-जाने बारे विस्तृत चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन गंभीर है। लोगों की परेशानियों को दूर करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। बी.आर.ओ. बुधवार तक दर्रे को बहाल कर लेगा और वहां से वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। दर्रा पार करने वालों की सुरक्षा व मदद के लिए प्रशासन ने कोकसर और मढ़ी में बचाव दल पहले ही तैनात कर दिए हैं।

घाटी में फंसे लोगों के लिए फरिश्ता बने उपासक
बर्फ  के बीच लाहौल घाटी में फंसे बाहरी लोगों की मदद को स्थानीय लोग आगे आए हैं। केलांग में फंसे करीब 25 लोगों को स्थानीय पंचायत उपप्रधान दोरजे उपासक ने अपने स्तर पर कमरा उपलब्ध करवाया है। उपासक उनके लिए नि:शुल्क खाने का व्यवस्था भी कर रहा है। उपासक ने बताया कि ये लोग बिहार, नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल के हैं। जो लाहौल में मजदूरी के लिए आए थे। उपासक ने बताया कि इनकी मदद के लिए स्थानीय लोग भी आगे आए हैं। उपासक ने बताया कि आपदा प्रबंधन की ओर से फंसे लोगों को पर्याप्त मदद नहीं मिल पा रही है। 

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