रावी नदी पर पुल गिरने के मामले ने पकड़ा तूल, कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

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Sunday, October 22, 2017-9:38 AM

चंबा (विनोद): रावी नदी पर बने परेल पुल के गिरने का कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए, जो इस पुल के गिरने के पीछे क्या कारण हैं, इस बारे में विस्तार से पता लगा पाए। लोक निर्माण विभाग के कांगड़ा जोन के चीफ इंजीनियर एस.के. गंजू ने शनिवार को शिमला में अपने विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कांगड़ा जोन के चीफ इंजीनियर एस.के. गंजू ने एस.सी. डल्हौजी बी.एस. बरवाल के साथ चंबा पहुंच कर परेल में गिरे पुल का मुआयना किया। उक्त अधिकारी ने शनिवार को अपने उच्चाधिकारियों को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें साफतौर पर इस पुल के गिरने का कारण कंस्ट्रक्शन या फिर डिजाइन को जिम्मेदार बताया है। अपनी रिपोर्ट में उक्त अधिकारी ने यह भी कहा है कि इन 2 संभावनाओं के अलावा तीसरी और कोई संभावना नजर नहीं आ रही है, क्योंकि मौके पर उन्होंने स्वयं जाकर देखा है कि पुल में डाली गई केबल साइड से टूटी हुई है। 


प्रदेश में बने अन्य पुलों को लेकर भी विभाग चिंतित
इन दोनों संभावनाओं में वास्तविक रूप से कौन-सा कारण जिम्मेदार है, इसके लिए विभाग उच्च स्तरीय कमेटी गठित करे ताकि इस मामले से जुड़ी बारीक से बारीक जानकारी की समीक्षा की जाए। बताया जाता है कि इस अनुशंसा रिपोर्ट के आधार पर अगले कुछ दिनों में सचिव लोक निर्माण या फिर ई.एन.सी. क्वालिटी कंट्रोल के प्रदेश स्तरीय उच्चाधिकारी को इस जांच कमेटी का जिम्मा सौंपा जा सकता है और विभाग अपने करीब 2 अन्य अधिकारियों को इसमें शामिल कर सकता है। विभाग नि:संदेह इस मामले को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है, क्योंकि एक तरफ जहां इससे विभाग की किरकिरी हो रही है तो साथ ही इस तकनीक के सहारे प्रदेश में बने अन्य पुलों को लेकर भी विभाग चिंतित है। 


जांच के कारणों को पता लगाना बेहद जरूरी
नि:संदेह परेल पुल के गिरने के कारणों का पता लगाया जाना बेहद जरूरी है। न सिर्फ इसलिए कि परेल पुल किस वजह से गिरा बल्कि इसलिए भी इस बात का पता लगाया जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस तकनीकी के माध्यम से प्रदेश के कई और पुल बनाए जा रहे हैं। इस घटना से सबक लिया जाना बेहद जरूरी है, ताकि जांच में अगर किसी प्रकार की खामी पाई जाती है तो उस खामी को दूर किया जा सके, ताकि भविष्य में यह निर्माण तकनीक पूरी तरह से सुरक्षित व पक्की साबित हो सके। रिपोर्ट में 2 संभावनाएं जताई गई हैं तो साथ ही उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर मामले की जांच करवाने की अनुशंसा रिपोर्ट शिमला भेज दी गई है।                          

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