शिंदे के इशारे से सियासी भूचाल, बोले-‘फिलहाल’ के CM वीरभद्र

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Thursday, August 17, 2017-8:07 PM

कांगड़ा: जिला कांगड़ा में वीरभद्र सिंह के वर्चस्व और उनके कैबिनेट सहयोगी जी.एस. बाली के करिश्मे से दो-चार हो रहे हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी सुशील कुमार शिंदे ने वीरवार को पंजाब केसरी के साथ एक विशेष भेंटवार्ता में बड़ा बयान दिया। सवालों की फेहरिस्त में उनसे पूछा गया कि अगर दोबारा सरकार बनती है तो कांग्रेस का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ‘‘फिलहाल के नेता तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ही हैं, चुनाव होने के बाद कौन क्या होगा इसका फैसला विधायक और हाईकमान ही करेंगे’’। सिर्फ एक लफ्ज ‘‘फिलहाल’’ को अपने जवाब में जोड़कर शिंदे ने और भी बहुत कुछ साफ किया। उन्होंने इसके साथ ही तालमेल बिठाने के लिए एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि वीरभद्र सिंह ने इस मौजूदा कार्यकाल में अपने पिछले छह दफा के कार्यकालों से डबल-ट्रिपल काम किया है।

जुबानी जंग पर काबू पाने के लिए हाईकमान ने प्रभारी बनाकर हिमाचल भेजा 
उनके इस दावे पर जब पंजाब केसरी ने उनसे यह सवाल किया कि अगर काम हुआ है तो क्या अब इस पर हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष और सी.एम. की आपसी जुबानी जंग से सारे किए-कराए पर क्या पानी नहीं फिर रहा है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस जुबानी जंग को काबू में लाने के लिए उनको हाईकमान ने प्रभारी बनाकर हिमाचल भेजा है। कई सवालों में उन्होंने खुले दिल से कांग्रेस की कमजोरियां स्वीकारने से इंकार नहीं किया। उन्होंने यह भी माना कि जल्द ही नेताओं के रिश्ते पर जमी बर्फ पिघल जाएगी। कौओं के नाम पर छिड़ी ताजी जंग पर उन्होंने कहा कि अभी जोश की हवा बह रही है। होश का दौर भी चलने शुरू हो गया है। अब जब वह आए हैं तो सब ठीक हो जाएगा। 

सेना के काम का श्रेय लेने के लिए भाजपा मचाती है हल्ला
इस बातचीत के दौरान शिंदे ने राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ रही कांग्रेस के बाबत बीजेपी पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता अभी तक अपनी वाणी का फायदा अपनी सत्ता के लिए उठा रहे हैं तो साथ ही इसी वाणी की वजह से देश के भीतर और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धोखा भी खा रहे हैं। आतंकवाद पर बीजेपी के हल्ले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब सेना और अन्य सुरक्षा बल आतंकवादियों को मौत की नींद सुला देते हैं तो श्रेय लेने के लिए भाजपा ऐसे हल्ला मचाने शुरू हो जाती है जैसे सब इसने किया हो। सेना और सुरक्षा बालों की हौसला अफजाई का जिक्र तक नहीं होता। उन्होंने कहा कि मौत की सजा पाए आतंकियों के शवों को उनके गृह क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। उनके जनाजों में हजारों-लाखों की भीड़ जमा हो जाती है। क्या ऐसा करना सही है? हर काम का हल्ला करके समुदायों को भड़काने का काम किया जाता है। कई काम ऐसे भी होते हैं जिन्हें चुपचाप कर दिया जाना ही देश हित में होता है।

कांगड़ा का नेता बनने के लिए आतुर हैं बाली 
खैर, शिंदे ने भी सियासी जंग के मैदान में वीरभद्र सिंह को ‘‘फिलहाल’’ का नेता बता कर अपनी कांग्रेस के फौजियों में खलबली तो मचा ही दी है। जहां बाली कांगड़ा का नेता बनने के लिए आतुर हैं तो वहीं प्रदेश लीडर का ठप्पा राजा अपनी छाती से उतरने देने के लिए तैयार नहीं हैं।

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