जानिए, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके ‘इस’ खिलाड़ी को क्यों करनी पड़ रही मजदूरी

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Wednesday, September 13, 2017-11:06 PM

पालमपुर: बैजनाथ क्षेत्र के छोटे से गांव धानग का रहने वाला हरजीत कुमार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कई मैडल जीत चुका है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज तक इस होनहार खिलाड़ी को सरकारी स्तर पर कोई मदद या प्रोत्साहन नहीं मिला। हरजीत का चयन फ्लोरिडा में होने वाली 11वीं मार्शल आर्ट गेम्ज में हुआ था लेकिन उसके पास वहां जाने के लिए पैसे नहीं थे। सरकारी स्तर पर गुहार लगाने पर मात्र आश्वासन ही मिले तो उस समय कुछ लोगों ने हरजीत की मदद के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया ताकि पैसों के अभाव में यह प्रतिभा दबी न रहे। इस अभियान में कई लोगों ने आर्थिक मदद की तब हरजीत का विदेश जाकर खेलने का सपना पूरा हुआ।

सरकार से न मिली मदद न मान-सम्मान
हरजीत फ्लोरिडा में देश के नाम 2 मैडल भी जीतकर आया लेकिन हैरानी की बात है कि इस प्रतिभा को सरकार ने आज तक पूछा तक नहीं। न कोई मदद की और न ही कोई मान-सम्मान। सरकार की उपेक्षा के चलते एक प्रतिभा उस समय पूरी तरह दब चुकी थी जब उसे रोजी-रोटी के लिए मजदूरी तक करनी पड़ी। इसके बाद एक मित्र के कहने पर उसने दोबारा अपने करियर पर ध्यान दिया। हालांकि अभी भी वह पेट पालने के लिए मजदूरी ही करता है।

कई बार दिखा चुका है प्रतिभा
अमरीका के फ्लोरिडा में 7-10 सितम्बर तक आयोजित 11वीं मार्शल आर्ट गेम्ज में हरजीत ने 2 पदक जीतकर देश व प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया है। हरजीत इससे पहले भी कई मैडल अपने नाम कर चुका है। वर्ष 2016 में देश में पहली बार आयोजित मार्शल आर्ट गेम्स में उसने स्वर्ण पदक जीता। इसके आधार पर उसका चयन दक्षिण अफ्रीका में होने वाली 10वीं वल्र्ड मार्शल आर्ट गेम्स के लिए हुआ। इसमें भाग लेने के लिए भी उसकी दोस्तों ने आर्थिक मदद की थी। हरजीत ने वहां पर सिल्वर मैडल जीता था। इसके अलावा भी कई प्रतियोगिताओं में उसने प्रतिभा दिखाई।

वीरेंद्र ने की पहल तो मदद को उठे कई हाथ
जहां सरकार इस प्रतिभा की गुहार को अनदेखा कर रही थी तो उसी समय सोशल मीडिया पर वीरेंद्र शर्मा ‘वीर’ से उसकी बातचीत शुरू हुई। वीरेंद्र शर्मा समाजसेवी व कवि हैं। उन्होंने इस प्रतिभा के प्रोत्साहन का बीड़ा उठाया और सोशल मीडिया पर उसकी मदद के लिए दिन-रात जुटे रहे। इतना ही नहीं, वह कई लोगों से मिले और मदद मांगी। उनके साथ धीरे-धीरे कई लोग जुड़ते गए और करीब सवा लाख रुपए इकट्ठे हो गए लेकिन हरजीत को भेजने का कुल खर्च 2.50 लाख रुपए तक आना था तो बाकी खर्च उठाने का जिम्मा धर्मशाला की समाजसेवी संस्था रू-ब-रू ने उठाया। यह संस्था शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा की है। इस तरह हरजीत का फ्लोरिडा जाने का सपना पूरा हुआ और हरजीत वहां से 2 पदक जीतकर लाया।

हरजीत ने बिना कोच के जीते 2 मैडल
वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एक प्रतिभा की सरकार इस तरह अनदेखी करती आई है। उन्होंने कहा कि बिना कोच के हरजीत देश के लिए 2 मैडल जीतकर आया है लेकिन सरकार ने मदद करना तो दूर सम्मान तक नहीं किया। वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जब वह वापस अपने देश पहुंचेगा तो सरकार कम से कम हरजीत का सम्मान जरूर करेगी।

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