कौल सिंह को मलाल, बोले-राजनीति के इस दौर में विकास की कोई कद्र नहीं

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Wednesday, November 15, 2017-12:07 AM

मंडी: चार दशक से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और द्रंग विधानसभा क्षेत्र में एकछत्र राज करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर कौल सिंह जनता को विकास पसंद न आने से खिन्न हैं। उनकी निजी राय है कि आज के दौर में जितना मर्जी विकास कर लो जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी द्रंग के विकास में खपा दी जिसके परिणाम स्वरूप ही आज पिछड़े क्षेत्र से द्रंग आदर्श विधानसभा क्षेत्र के तौर पर उभरा है लेकिन उन्हें मलाल है कि आज के दौर में विकास की कोई कद्र नहीं रह गई है। 

जीत को लेकर भी आश्वस्त हैं कोल
इस बार द्रंग में उन्हें अपने ही करीबी रहे पूर्ण चंद ठाकुर के बागी बनने से चुनाव में आंशिक नुक्सान का आभास तो है लेकिन वह प्रदेश विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक होने और अपने राजनीतिक अनुभव को आधार मानते हुए जीत को लेकर भी आश्वस्त दिख रहे हैं। एक विशेष बातचीत में उन्होंने अपने विचार सांझा करते हुए कहा कि यह मेरा आखिरी चुनाव है जिसे मैं जीत रहा हूं। मैंने कभी यह नहीं कहा था कि यह मेरा आखिरी चुनाव होगा लेकिन इतना जरूर है कि मैंने ऐलान कर रखा है कि मैं 75 वर्ष की आयु में स्वयं राजनीति से संन्यास ले लूंगा और युवा पीढ़ी को आगे आने का मौका दूंगा। 

जितना मर्जी विकास करो जनता का रिस्पांस अच्छा नहीं
उन्होंने कहा कि आज के इस दौर की राजनीति में विकास की कोई कद्र नहीं है। पहले विकास के आधार पर वोट मिलते थे। लोग इलाके में एक भी सार्वजनिक काम किया हो तो उसको याद रखते थे लेकिन अब विकास को वोट नहीं मिलते। जितना मर्जी विकास करो जनता का रिस्पांस अच्छा नहीं मिलता जबकि हमारा ध्येय इलाके को आदर्श बनाना होता है। इस बात की खुशी है कि दूसरे राज्यों के मुकाबले हिमाचल में आज भी राजनीति स्वच्छ है। लांछन की राजनीति को लोग यहां ज्यादा तवज्जो नहीं देते। 

द्रंग में विकास कांग्रेस सरकारों की देन
उन्होंने कहा कि 1977 में जब मैं राजनीति में आया तो द्रंग प्रदेश में सबसे पिछड़ा इलाका था। पठानकोट से मंडी एक ही कच्ची सड़क थी और लोग पीठ पर बोझा लाद मीलों पैदल चलते थे। मैंने विधायक बनते ही सड़कों को प्राथमिकता दी और आज जो द्रंग में सड़कों का जाल बिछा है उसमें 100 प्रतिशत योगदान कांगे्रस सरकारों का रहा और मात्र 33 महीनों के लिए भाजपा के विधायक यहां 1990 में बने लेकिन उनका कोई योगदान क्षेत्र के विकास में नहीं रहा। 

आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनकर उभरा द्रंग
उन्होंने कहा कि आज हर पंचायत में जमा 2 स्कूल, हर 2 पंचायतों के बाद पी.एच.सी. और पशु औषधालय, पटवार राजस्व घर, सी.एच.सी., आई.पी.एच., बिजली और लोक निर्माण विभाग के डिवीजन और सब डिवीजन, कालेज, गांव-गांव में सड़क व देश का नौंवा प्रतिष्ठित संस्थान आई.आई.टी. मेरे क्षेत्र कमांद में है। 2006-07 में यहां हमने नया उपमंडल बनाया और एस.डी.एम. बैठाया। अब इस बार डी.एस.पी. बैठाया, जिसकी मुझे खुशी है कि आज द्रंग आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनकर उभरा है। 

मलाई से मेरा मतलब विकास था
पंडित सुखराम कहते हैं कि आपने ही मलाई खाई है? इसके सवाल पर वह बोले कि मलाई से मेरा मतलब विकास था। मैंने उनके बेटे को कहा था कि जब वह मंत्री थे तो उन्होंने कांग्रेस सरकार से ढेर सारा विकास अपने क्षेत्र के लिए करवाया और मंत्री रहते सारी सुविधाओं का भोग किया और फिर पार्टी ये कहकर छोड़ दी कि मेरे विकास कार्य में कौल सिंह ने रोड़े अटकाए, यह गलत है। मैंने उनके क्षेत्र में सी.एच.सी. खोली व दो-दो हैल्थ सैंटर भी दिए। 

युवाओं को दिया ये संदेश
युवाओं को क्या संदेश है आपका? इसके सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में युवा आगे आने चाहिएं। अब युवाओं का जमाना है परंतु पढ़े-लिखे युवा ही आगे आएं तो अच्छा रहेगा। मेरे क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सरीखे जीते तो बेड़ा ही गर्क होगा क्योंकि जिन्हें शपथ ही लेनी न आए तो वह विकास क्या खाक करेंगे।

द्रंग की जनता तय करेगी मेरा उत्तराधिकारी 
अपने उत्तराधिकारी के रूप में किसे उपयुक्त मानते हो? इस सवाल पर उनका कहना है कि दं्रग की जनता, मेरे कार्यकत्र्ता और हाईकमान ही तय करेंगे कि मेरा उत्तराधिकारी कौन होगा। मेरे चाहने व न चाहने का सवाल ही नहीं है। मेरे लिए मेरे क्षेत्र की जनता ही निर्णायक है। 

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