Watch Video: हिमाचली जेलें सिखा रही जिंदगी का रहस्य

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Thursday, May 18, 2017-1:33 PM

धर्मशाला: कारागार वह स्थान है, जहां पर कैदियों को अपने किए गए कृत्यों को सुधार कर नया जीवन जीने के लिए तैयार किया जाता है। हिमाचल प्रदेश ने भी भारत की इस परंपरा में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। जेल प्रशासन द्वारा मिली जानकारी के अनुसार भारत का कारागार प्रबंधन तंत्र बहुत पुराने समय से चला आ रहा है। प्राय: कैदियों को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है लेकिन भारत में कैदियों को पश्चाताप के माध्यम से सुधार लाने तथा अपने सम्मान को फिर से अर्जित करने का मार्ग दिखाया जाता है। जेल प्रशासन की मानें तो कैदियों को अपना जीवन दोबारा शुरू करने का एक अवसर प्रदान किया जाता है। भारतीय संविधान के 7वें अनुच्छेद की दूसरी सूची के अनुसार कारागार राज्य के विषय के अंतर्गत आता है। इसे कारागार अधिनियम 1894 व संबंधित राज्य के नियमों के अनुसार संचालित किया जाता है। 


नया जीवन शुरू करनेे को किया जा रहा तैयार 
जिला एवं मुक्त कारागार धर्मशाला में पारंपरिक आदर्श मानवीय तथा कल्याणकारी तरीके से कैदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए व नया जीवन शुरू करने के लिए तैयार किया जाता है। इसका अनुसरण करते हुए राज्य के कंडा व नाहन में आधुनिक केंद्रीय कारागार स्थापित किए हैं।


आत्मनिर्भर बनाने पर दिया जा रहा बल
कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जेल प्रशासन द्वारा बल दिया जा रहा है। जिला कारागार धर्मशाला की बात करें तो कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्तमान में बुनाई, सिलाई-कटाई, सफाई कार्य, धोबी तथा नाई का कार्य भी सिखाया जा रहा है। जेल प्रशासन की मानें तो धर्मशाला, चंबा, मंडी, कुल्लू, कैथू, सोलन, ऊना तथा हमीरपुर में जिला कारागार स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नूरपुर में एक उप-कारागार भी स्थापित की गई है। बिलासपुर के जबली रघुनाथपुरा में खुली जेल भी बनाई गई है, जिसमें अच्छा व्यवहार करने वाले कैदियों को रखा जाता है। 
 

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