सरकार की अधिसूचना पर भड़का महासंघ, फरमान को दिया तुगलकी करार

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Sunday, August 13, 2017-11:49 AM

शिमला: सरकारी कार्यालय में कर्मचारियों के लिए ड्रैस कोड लागू किए जाने पर महासंघ भड़क गया है। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने सरकार के इस फैसले को तुगलकी फरमान करार दिया है। महासंघ ने चेताया कि यदि सरकार अपना तुगलकी फरमान जल्द वापिस नहीं लेती है तो इस फैसले के खिलाफ प्रदेश भर में हस्ताक्षर अभियान छेड़ा जाएगा। महासंघ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि ड्रैस कोड लागू करना ही है तो उसके दायरे में मंत्री व विधायकों को भी शामिल किया जाए। महासंघ का तर्क है कि मंत्री और विधायक भी सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन व पैंशन लेते हैं, ऐसे में उन पर भी ड्रैस कोड जारी होना चाहिए।


कर्मचारी क्या पहनेंगे और क्या खाएंगे
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एस.एस. जोगटा ने विशेष बातचीत में कहा कि सरकार का यह फैसला एक तरह से कर्मचारियों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट है। लोकतंत्र में कोई भी सरकार यह तय नहीं कर सकती है कि कर्मचारी क्या पहनेंगे और क्या खाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखा रही है और ऊपर से तुगलकी फरमान कर्मचारियों पर थोपे जा रहे हैं। जोगटा ने कहा कि चुनावी वर्ष में सरकार को कर्मचारियों को खुश करने के प्रयास करने चाहिए न कि उलटे-सीधे फैसले लेकर कर्मचारियों को परेशानी में डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के अंदर सरकारी कर्मचारियों के लिए यह निर्णय तर्कसंगत है लेकिन इसे सरकारी कार्यालय पर नहीं थोपा जाना चाहिए।


फैसले को वापस ले सरकार: गुलेरिया
महासंघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया ने भी सरकार के डै्रस कोड के फैसले को गलत करार दिया है। उन्होंने कहा कि ड्र्रैस कोड के आदेश जारी करना कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन करने जैसा है, ऐसे में सरकार को इस फैसले को तत्काल वापस ले लेना चाहिए। 


बिना होमवर्क के लिया फैसला: विनोद 
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि सरकार ने यह फैसला बिना होमवर्क के लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह फैसला जल्द वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय में फैशन न हो ये ठीक है लेकिन कर्मचारी क्या पहनेगा, क्या नहीं पहनेगा, इसका फैसला सरकार नहीं ले सकती है।


ब्यूरोक्रेट्स जानबूझ कर अटका रहे रोड़ा: जोगटा
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एस.एस. जोगटा ने कहा कि कर्मचारियों की कई ऐसी मांगें है जो ब्यूरोके्रट्स के चलते लंबित पड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जानबूझ कर कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें सेवानिवृत्त आयु बढ़ाना, वेतन विसंगति दूर करना व पुरानी पैंशन बहाली सहित अन्य मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पैंशनर्ज की मुख्य मांग में भी ब्यूरोक्रेट्स रोड़े अटकाए हुए हैं। 

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