नेता प्रतिपक्ष के दर्जे को लेकर सीएम जयराम ने दिया बड़ा बयान

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Tuesday, January 9, 2018-9:15 AM

धर्मशाला/गग्गल : विधानसभा शीतकालीन सत्र के लिए जिला कांगड़ा पहुंचते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में परिवर्तन हुआ है और इसके साथ प्रदेश के हर वर्ग की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। उन्होंने पत्रकारों से अनौपचारिक भेंटवार्ता में कहा कि भाजपा की सरकार के गठन के साथ ही प्रदेश में नए दौर का आगाज नए जुनून के साथ नए युग की शुरूआत हुई है। उन्होंने कहा कि युवा संयम रखें सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि बेरोजगारी को दूर करने के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन करेगी। बुजुर्गों के लिए उनकी सरकार ने पहले ही बड़ा फैसला लिया है। सामाजिक सुरक्षा पैंशन की आयु को 80 वर्ष से कम कर 70 वर्ष किया गया है। उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद यह पहला धर्मशाला प्रवास है 13वीं विधानसभा का पहला शीतकालीन विधानसभा सत्र है। इसमें सारी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। विधानसभा के सदस्यों को शपथ दिलाने के साथ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। राज्यपाल अभिभाषण देंगे। उस पर चर्चा करने के साथ ही धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाएगा। 

नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने का निर्णय नियम के अनुसार लिया जाएगा
जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष के पास एक तिहाई बहुमत न होने पर नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने का निर्णय नियम के अनुसार लिया जाएगा। सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपने गृह विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करने के उपरांत सीधे हवाई मार्ग से कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे जहां पर कांगड़ा-चम्बा लोकसभा सांसद शांता कुमार, खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर, स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार, शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी, परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर, उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर, विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रमेश धवाला, विधायक राकेश पठानिया व अर्जुन ठाकुर सहित जिला भाजपा पदाधिकारी व भारी संख्या में कार्यकत्र्ता उपस्थित रहे।

दूसरी राजधानी व सी.यू. पर जल्दबाजी नहीं
धर्मशाला पहुंचने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर धर्मशाला को दूसरी राजधानी का दर्जा देने व केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह दोनों ही मुद्दे अहम हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों मुद्दों पर जल्दबाजी दिखाना सही नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली है और सभी पक्षों का अध्ययन करने के बाद ही निर्णय लिए जाएंगे। तपोवन स्थित विधानसभा परिसर में परंपरा के अनुसार ही चलती रहेगी। इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है।


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