CM ने सुख राम पर कसा तंज, कहा-मैं आया राम गया राम नहीं

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Saturday, August 19, 2017-1:05 AM

मंडी: हिमाचल प्रदेश की राजनीति के 2 धुरंधर जब लंबे समय के बाद एक मंच पर इकट्ठे हुए तो कड़वाहट भरी पुरानी यादें ताजा हो गईं। कांग्रेस प्रभारी सुशील शिंदे के दौरे को लेकर रखे गए कार्यक्रम में जोश के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुख राम भी पहुंचे। जब उन्हें बोलने का मौका मिला तो उन्होंने खुद को संचार क्रांति लाने का श्रेय दिया और सी.एम. वीरभद्र सिंह को विकास का मसीहा कहा। इसके बाद मंच पर मौजूद पं. सुखराम पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आया राम गया राम नहीं हूं। जब तक पद है तो हरी-हरी अगर पद नहीं तो बागी। उन्होंने कहा कि पं. सुखराम में राजनीतिक स्थिरता नहीं है। कभी यहां छलांगें मारते रहे और वहां। कभी दायं तो कभी बायं। बाकी समझदार को इशारा ही काफी है। इनकी वजह से ही 1998 में भाजपा सत्ता में आई और कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा। इसके बावजूद मैं पं. सुखराम की उनके काम की वजह से कद्र करता हूं कि इन्होंने संचार क्रांति लाई और जब मैंने पहला चुनाव मंडी से लड़ा तो उन्होंने पूरे संसदीय क्षेत्र में अपने साथ वाहन में मेरे लिए प्रचार किया।

जल्द लिखने वाला हूं किताब, सब लिख डालूंगा
उन्होंने कहा कि मैं अपनी किताब जल्द लिखने वाला हूं जिसमें सब लिख डालूंगा और सारी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिंदे मेरे इस वक्त इमीजेट बॉस हैं मैं इनकी इज्जत करता हूं। आज हमें मिलजुल कर रहना है लेकिन मीडिया वाले भी आज एक नहीं हैं, एक पूर्व लिखता है तो दूसरा पश्चिम। बाद में मीडिया के सवालों का जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि हम एकजुट हंै फिर से सरकार बनाने के लिए पार्टी तैयार है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस पार्टी में किसी भी तरह की फूट नहीं है। 

भाजपा वाले अपने बाप को भी नहीं बख्शते तो मुझे क्या बख्शेंगे
उन्होंने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा वाले अपने बाप को भी नहीं बख्शते तो मुझे क्या बख्शेंगे। गुडिया प्रकरण का हवाला देते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा कि भाजपा के पास प्रदेश में कोई मुद्दा नहीं था, मगर गुडिया प्रकरण के बहाने भाजपा को सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का बहाना मिल गया जबकि मैंने पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सी.बी.आई. से जांच की मांग की थी। 

अभी कोर्ट केस में फंसा हूं फिर जवाब दूंगा : सुख राम 
जब कार्यक्रम समाप्त हुआ तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन पर जो आरोप लगे हैं, जब तक वह उनसे बरी नहीं हो जाते तब तक सक्रिय राजनीति में नहीं आएंगे, वहीं उन्होंने भाजपा की सरकारों को भी विकास का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वर्ष 1999 में भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई थी लेकिन उस सरकार में उनका भी योगदान था इसलिए भाजपा सरकार के दौरान हुए विकास का श्रेय अब कांग्रेस के खाते में चला गया है जिसके लिए सी.एम. ने अपने संबोधन में उनकी तारीफ भी की और तंज भी कसे। 

सी.एम. बुजुर्ग नेता, कुछ भी बोल सकते हैं : अनिल
2 नेताओं के बीच हुई जुबानी जंग के बाद पंडित सुख राम के पुत्र एवं वीरभद्र कैबिनेट के सहयोगी अनिल शर्मा बचाव पक्ष में उतर आए। उन्होंने कहा कि सी.एम. बुजुर्ग नेता हैं और कुछ भी बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंडित सुख राम ने कभी कांग्रेस नहीं छोड़ी बल्कि उन्हें निकाला गया था और आज वह फिर से कांग्रेस पार्टी के लिए पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं।

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