यहां आवाजाही के लिए खोली बंद सड़कें, 300 गांवों की बिजली बहाल करने में हासिल की सफलता

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Tuesday, January 10, 2017-4:32 PM

चंबा: हिमाचल प्रदेश के जिले चंबा में मौसम के बदलते हालात के देखते जिलावासियों को राहत देने का काम किया जा रहा है। सोमवार को सुबह से दोपहर तक धूप खिली रही। दोपहर के बाद स्थिति इस कदर खराब हुई कि हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, वहीं ऊंचे क्षेत्रों में फिर से बर्फबारी का दौर शुरू हो गया। उधर, मौसम के इस बदलाव का लोक निर्माण विभाग व बिजली बोर्ड ने लाभ लेते हुए सोमवार को अपनी प्रभावित सेवाओं को फिर से सुचारू बनाने के लिए अभियान छेड़ दिया जिसके चलते जिला की बंद कई सड़कों को फिर से वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। साथ ही बिजली बोर्ड ने भी बंद पड़ी विद्युत आपूर्ति को बहाल करने की प्रक्रिया के तहत रविवार को जिला चम्बा के करीब 600 गांव जो अंधेरे में डूबे हुए थे जिनमें से सोमवार शाम तक 300 के करीब गांवों की बंद बिजली व्यवस्था को बोर्ड ने बहाल करने में सफलता हासिल कर ली है। लोक निर्माण विभाग की मानें तो जिला भर में रविवार तक जो 63 बंद पड़ी सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है।भरमौर की बात है तो वहां खड़ामुख से आगे गाड़ी का जाना अब संभव इसलिए नहीं है क्योंकि बर्फ हटाने के बाद सड़क पर फिसलन के चलते गाडिय़ों का भरमौर तक पहुंचना बेहद मुश्किल कार्य है।


मजदूरों के लिए नहीं कोई पुख्ता प्रबंध
जिला में हुई भारी बर्फबारी के कारण लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड व आई.पी.एच. विभाग को नुक्सान पहुंचा है। विभाग के मजदूर व अधिकारी इस विकट स्थिति से लोगों को निजात दिलाने में जुट गए हैं। हैरानी की बात है कि मजदूर व कर्मचारी तो शून्य से नीचे के तापमान पर कार्य करके लोगों की परेशानियों को दूर करने में जुटे हुए हैं लेकिन इन मजदूरों को बर्फ की इस ठंड से बचाने के लिए विभाग ने कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए हैं। विभाग ने बर्फ वाले क्षेत्रों में तैनात मजदूरों को स्नो किट जैसी कोई सुविधा मुहैया नहीं करवाई है। ऐसे में मजदूरों को बिना गर्म दस्तानों व गर्म जूतों के बर्फ हटाते या फिर बर्फ में काम करते हुए देखा जा सकता है। ऐसे में कर्मचारी संघों और उनके नेताओं की सक्रियता पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है कि वे चंदा प्राप्त करने या फिर अपनी राजनीति चमकाने में तो इन वर्गों का हितैषी होने का दावा करते हैं लेकिन इन वर्गों को अभी तक मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने में उन्होंने रुचि नहीं दिखाई है।


 

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