सदियों से इस गांव में नहीं चलते भारत के कानून, जानिए रहस्य

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Tuesday, September 26, 2017-4:01 PM

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला में आज भी एक गांव ऐसा है, जहां भारतीय संसद के कानून लागू नहीं हो पाए हैं। सदियों से मलाणा गांव में निवासियों की खुद की संसद और कानून हैं। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं। वे इस बात का सबूत भी पेश करते हैं। मान्यता है कि सिकंदर की सेना के कुछ योद्धा युद्ध के दौरान काफी जख्मी हो गए थे और यहां पर ही आकर बस गए। बताया जाता है कि मुगल शासक अकबर बीमारी का इलाज कराने यहां आए थे। स्वस्थ होने पर अकबर ने यहां पर कर भी माफ कर दिया था। यही वजह है कि इस गांव को हिमालय का एथेंस भी पुकारा जाता है। 
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कुल्लू क्षेत्र से अलग हैं यहां के लोगों के रीति-रिवाज
यहां के लोगों की जीवन शैली और रीति-रिवाज भी कुल्लू क्षेत्र से अलग हैं। इस गांव में चुनी जाने वाली 14 सदस्यीय संसद गांव के कायदा कानून को लागू करती है। इसी व्यवस्था के तहत यहां विवादों का निपटारा संसद करती है। कुल्लू घाटी के उत्तर पूर्व में स्थित चंद्रघाटी के बीच 8000 फीट की ऊंचाई पर बसे मलाणा गांव में यह व्यवस्था अधिष्ठाता देवता जमलू के अनुसार ही लागू होती है। 


संसद का स्वरूप इससे मिलता है 
मलाणा गांव की संसद का स्वरूप ग्रीस से मिलता जुलता है। संसद के 8 सदस्यों का चुनाव होता है। जबकि अन्य सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। मलाणा की संसद में दो सदन हैं। यहां से व्यक्ति संतुष्ट न होने पर ऊपरी सदन में मामला रखता है। 


मलाणा गांव में 2450 लोगों की आबादी
मलाणा गांव में लोगों की आबादी 2450 हैं। गांव के मतदाता निर्वाचन आयोग के चुनाव में हिस्सा लेते हैं। इतना ही नहीं प्रशासन लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर भी आयोजित करता है। 

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