मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर Bali ने दिया बड़ा बयान, पढ़िए क्या कहा

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Saturday, September 23, 2017-6:35 PM

ऊना (सुरेंद्र): पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के ताकतवर मंत्री जी.एस. बाली और मुख्यमंत्री के बीच चल रहे टकराव को लेकर शुक्रवार को पंजाब केसरी टीम की जी.एस. बाली से विशेष भेंटवार्ता हुई, जिसमें उन्होंने हर विषय पर पूछे गए सवालों का उत्तर दिया। बाली ने कहा कि वह अनुशासन में रहने वाले व्यक्ति हैं और हमेशा सीधी बात करने में विश्वास रखते हैं। उनके मन और दिमाग में जो बात होती है, उसे व्यक्त करने में पीछे नहीं हटते हैं। भले ही यह किसी को अच्छा लगे या न लगे। नाराजगी के होने पर कौन किसको मनाता है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कभी मुख्यमंत्री मुझे मना लेते हैं तो कभी मैं मुख्यमंत्री को मना लेता हूं। अधिकतर मौकों पर मुख्यमंत्री मुझे बुलाकर नाराजगी दूर करते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा अनुशासनहीन कहे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री क्या मानते हैं, यह उन्हें पता होगा लेकिन सी.एम. के बयान के बाद ही दोनों के बीच सियासी और दूसरे मसलों पर कई घंटे की बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से 3-4 राऊंड की जो बात हुई है, वह काफी अहम है। बात परिवार से लेकर राजनीतिक पार्टी, सरकार और कैंडीडेट जैसे मसलों को लेकर भी हुई। 

सुधीर से पारिवारिक, सोशल और एन.जी.ओ. पर हुई मीटिंग
सुधीर शर्मा के साथ हाल ही में हुई मीटिंग को लेकर उन्होंने कहा कि उनके साथ यह मीटिंग पारिवारिक, सोशल और एन.जी.ओ. जैसे विषयों को लेकर हुई थी। काफी समय से सुधीर शर्मा उनके साथ मीटिंग को लेकर समय मांग रहे थे, जैसे ही उनको समय मिला तो वह उनके एन.जी.ओ. के कार्यक्रम में गए। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा एन.जी.ओ. के जरिए महिलाओं की भलाई के लिए कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनकी भी काफी रुचि है। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा ने अभी और भी उनसे समय मांगा है, ऐसे में जब भी उनके पास फुर्सत होगी तो उनके साथ बैठेंगे। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा उनके पड़ोसी भी हैं और उनके पिता पंडित संत राम उनके काफी नजदीकी थे। जब संत राम से नजदीकियां थीं और उनके घर आमतौर पर आना-जाना होता था तो सुधीर शर्मा उस समय काफी छोटे थे। पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों के अतिरिक्त हर व्यक्ति ने अपने हिसाब से राजनीति करनी होती है। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा काफी होशियार राजनेता हंै। उन्हें पता है कि उन्हें कौन-सी राजनीति करनी है। मेरे साथ राजनीतिक नहीं पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर बात हुई है। पारिवारिक रिश्ते काफी लम्बे चलते हैं जबकि राजनीतिक रिश्तों में खटास आ जाती है।

जो मेरे मन में है वही दिमाग और जुबान पर 
पहले काली भेड़ें और अब सफेद कौओं की कांगड़ा में राजनीति के सवाल पर बाली ने कहा कि अब भविष्य में न काली भेड़ों की चर्चा होगी और न ही सफेद कौओं की। उन्होंने कहा कि उनके जो मन में है, वह दिमाग में भी है और वही जुबान पर है। मैं 2 प्रकार की जिंदगी नहीं जी सकता। विरोध करना हो तो खड़ा होकर करता हूं और सामने करता हूं। जब मुझे लगेगा कि मैं किसी के साथ नहीं चल सकूंगा तो एक मिनट में रिजाइन कर बाहर आने में देर नहीं लगाऊंगा। एक परिवार एक टिकट के मामले में उन्होंने कहा कि वह परिवारवाद की राजनीति में विश्वास नहीं रखते हैं। एक बात मानता हूं कि यदि एक व्यक्ति उसी प्रोफैशन में है और यदि उसी परिवार का व्यक्ति योग्य है तो वह उसमें योग्यता के आधार पर शामिल हो सकता है। समाज में सेवा करने वाला योग्य व्यक्ति आगे आ सकता है, चाहे वह पारिवारिक हो या कोई अन्य। बाली ने कहा कि कोई मंत्री है और उसका बेटा इसी हैसियत से आगे आना चाहे तो यह गलत है। किसी को थोपना नहीं चाहिए बल्कि राजनीति में आने वाले लोगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। मंत्री के बेटे को सेवा के आधार पर यदि लोग चाहते हैं तो राजनीति में आने का कोई हर्ज नहीं है। किसी को थोपना नहीं चाहिए। जब-जब किसी को थोपने का प्रयास किया तो वह बुरी तरह से फेल हुआ है। ऐसे कई उदाहरण हैं पर वह नाम नहीं लेना चाहिए। 

सुक्खू को लगाना या हटाना सोनिया जी का अधिकार
सुक्खू के संदर्भ में मुख्यमंत्री की बयानबाजी को लेकर बाली ने कहा कि किसी ने क्या कहा, वह इस मामले में नहीं पडऩा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सुक्खू को लगाना या हटाना यह सोनिया जी का अधिकार क्षेत्र है। राहुल गांधी अब इस काम को देखते हैं। जब उन्होंने बना दिया और पार्टी का अध्यक्ष बन गया तो उस कुर्सी को उतना सम्मान देना चाहिए क्योंकि अध्यक्ष पार्टी को रिप्रैजैंट करता है। बाली ने कहा कि सम्मान देते हुए अध्यक्ष को भी चाहिए कि जो मुख्यमंत्री है वह काफी कद्दावर हैं और उम्रदराज हैं, उनका तजुर्बा 50 वर्ष का हो गया है। ऐसे में उनकी भावनाओं को कहीं ठेस पहुंचती है तो इसका भी ध्यान रखना चाहिए। पार्टी में बैलेंस बनाकर काम करना चाहिए। यदि बैलेंस बनाकर चलेंगे तभी भला होगा। यदि बैलेंस नहीं बनेगा तो किसी भी पार्टी का भला नहीं होगा। कई पार्टियों में पोस्टरवाद चला हुआ है तो कई पार्टियों में वन मैनशिप चली हुई है। वहां सिर्फ मैं और मैं ही चला हुआ है। ये बातें लोकतंत्र में नहीं चलती हैं। पाॢटयों में टीम वर्क होना चाहिए। 

वीरभद्र सिंह हर हाल में लड़ेंगे चुनाव 
वीरभद्र सिंह के चुनाव न लडऩे से पार्टी को नुक्सान हो सकता है, इस सवाल पर बाली ने कहा कि कई बार गर्मजोशी या इमोशनल होकर बात होती है जबकि ऐसा नहीं है। यदि सुक्खू नहीं हटे तो वीरभद्र सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे। बाली ने कहा कि परिवार में जब कोई बुजुर्ग बात कहे तो बच्चों को बुरा नहीं मानना चाहिए तो यदि बच्चे कुछ कहते हैं तो बुजुर्गों को बुरा नहीं मनाना चाहिए। दोनों को एक-दूसरे को मना लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह रिकार्ड पर यह बात कह रहे हैं कि वीरभद्र सिंह चुनाव लड़ेंगे। वीरभद्र सिंह मंझे हुए राजनेता हैं, चुनाव लड़ेंगे और चुनाव में डटे रहेंगे। पार्टी में वीरभद्र सिंह की अहम भूमिका होगी। वीरभद्र सिंह सभी को साथ लेकर काम करेंगे। 

अभी तक वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 
क्या आप मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, इस सवाल पर बाली ने कहा कि अभी तक वीरभद्र सिंह उस कुर्सी पर हैं। जब कुर्सी खाली होगी और चुनाव जीतकर आएंगे तो पार्टी और पार्टी के विधायक जीतकर आएंगे, वे फैसला करेंगे। समर्थकों की भावनाएं होती हैं। उन भावनाओं को भी देखा जाएगा। हालांकि वह भविष्य की बात नहीं करते। भविष्य में क्या होने वाला है, यह किसी को पता नहीं। सी.एम. कैंडीडेट कौन होगा, इसको लेकर प्रभारी शिंदे काफी कुछ स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जो भी हिमाचल का मुख्यमंत्री बनेगा, उसको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वित्तीय स्थिति सहित बेरोजगारी और कई दूसरे मसले हैं, जो किसी भी आने वाले मुख्यमंत्री के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होंगे। 

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