जंगली जानवरों के आतंक से परेशान मजबूरन किसान कर रहे ये सब

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Monday, September 11, 2017-3:40 PM

सिहुंता: जंगली जानवरों के नुक्सान को देखते हुए किसानों को मक्की की फसल पकने से पहले बरसात के दिनों में ही काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। भटियात के किसानों को जंगली जानवरों के आतंक से इन दिनों बुरी तरह से जूझना पड़ रहा है। किसानों ने भरी बरसात में नुक्सान को देखते हुए मक्की की फसल को समेटना शुरू कर दिया है। बंदरों का नुक्सान तो किसान दशकों से झेल रहे हैं परंतु अब सूअरों द्वारा फसलों को बड़े स्तर पर बर्बाद किया जा रहा है। यह नुक्सान किसानों के लिए असहनीय बनता जा रहा है।

फसलों की सुरक्षा के लिए किसान दे रहे पहरा
इन दिनों मक्की व धान की प्रमुख फसलों के अलावा अनेक प्रकार की दालें, फल व सब्जियों का उत्पादन अंतिम दौर पर है। अधिकांश फसलें पकने को भी तैयार हैं परंतु फसलों को जंगली व बेसहारा पशुओं से बचाने की किसानों की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। इन दिनों किसानों को दिन में बंदरों के अलावा रात को बेसहारा पशुओं, जंगली सूअरों, गीदड़ों सहित कई पक्षियों से फसलों को बचाना पड़ रहा है। फसलों को किसानों द्वारा सुरक्षित करने में कई प्रकार के खतरों का भी सामना करना पड़ता है। फसलों की सुरक्षा के लिए किसान खेतों में लगातार पहरा करने के अलावा कई प्रकार के आवाज करने के उपकरणों के माध्यम से भी जानवरों को भगाने का प्रयास करते हैं परंतु जानवर दिन-प्रतिदिन निर्भय होते जा रहे हैं।

किसानों के लिए बनी मुसीबत
इसमें ज्यादातर मक्की की फसल की रखवाली करना किसानों के लिए ज्यादा मुसीबत बनती जा रही है। मक्की की फसल की बिजाई से इस फसल के काटने के बाद तक किसानों को रखवाली करनी पड़ती है। किसानों की सरकार से वर्षों से मांग चल रही है कि बेसहारा पशुओं के अलावा जंगली सूअरों व बंदरों से निजात दिलाने के लिए ठोस पहल की जाए ताकि कृषि व्यवसाय को किसान सही व निर्भीक होकर अपनाने के साथ कृषि व्यवसाय से स्वावलंबी होने की ओर रुझान बना सकें।

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